सरना कोड की मांग को लेकर कांटाडीह ओर चांडिल स्टेशन में रेलवे ट्रैक पर उतरे आदिवासी संगठन के लोग , People of tribal organization descended on the railway track in Kantadih and Chandil station demanding Sarna Code.

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✍️ शशि भूषण महतो
ईचागढ़ - केन्द्रीय सरना समिति, सेंगेल अभियान सहित विभिन्न आदिवासी संगठनों का पूर्व घोषित एकदीवसीय भारत बंद के तहत आदिवासी संगठनों के लोगों ने आद्रा रेल डिवीजन के कांटाडीह रेलवे स्टेशन ओर चांडिल रेलवे स्टेशन व रेलवे ट्रैक को जाम कर सरना कोड लागू करने का मांग किया। रेलवे चक्का जाम करने से इस रूट में चलने वाली सभी ट्रेनें दुसरे स्टेशनों पर घंटों रूके रहे। मालूम हो कि आदिवासी संगठनों के लोगों ने सरना धर्म कोड लागू करने के लिए आदिवासी सेंगेल अभियान द्वारा सांकेतिक भारत बंद और रेल तथा रोड जाम के तहत इस रेलवे ट्रैक को जाम किया ।
रेल चक्का जाम का नेतृत्व सोनाराम सोरेन ने किया। उन्होंने कहा कि आदिवासियों को भी धार्मिक आजादी होना चाहिए, संविधान के अनुसार धार्मिक आजादी पर किसी की पाबंदी नहीं हो सकती है। 

उन्होंने कहा कि वर्ष 2011 की जनगणना में आदिवासियों की संख्या 50 लाख थी जबकि जैन की संख्या 44 लाख थी। सरकार ने जैन धर्म को अपनी संवैधानिक अधिकार दे दिया है परंतु आदिवासियों को अपना हक नही मिला है। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों का अलग अलग कोड हैं, तो सरना कोड लागू क्यों नहीं होगा। 


उन्होंने कहा कि अब हमारा आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक की हमारी मांगे पुरी नहीं हो जाती है। आंदोलन का ही भारत बंद एक आगाज है। उन्होंने कहा कि 10 दिसंबर को मधुबन गिरिडीह में मारंगबुरू बचाओ अभियान, 17 दिसंबर को चाईबासा में सेंगेल जनजागरण सभा तथा 22 दिसंबर को दुमका में हासा भाषा विजय दिवस का आयोजन भी किया गया है। 

मौके पर भारत के सेंगेल दिशोम परगना सोनाराम सोरेन, सेंगेल अभियान सरायकेला खरसावां जिला मुख्य संयोजक कालीपद टुडू, , सुनील मुर्मू, उदय मुर्मू, सुरेन हांसदा ,श्रीनंद सोरेन, धीरेंद्र नाथ बास्के, बुद्धेश्वर मुर्मू, बलराम मुर्मू, गीनू माझी, सिंकु हांसदा, सोनु मांडी, महावीर टुडु सहित सैकड़ों महिला पुरुष उपस्थित थे।

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