अंतर्राष्ट्रीय महिला काव्य मंच की मासिक गोष्ठी संपन्न , Monthly seminar of International Women's Poetry Forum concluded

0

दिनांक 29.10.23 को अंतराष्ट्रीय महिला काव्य मंच की मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन डॉ शारदा प्रसाद की अध्यक्षता में ब्रिगेडियर एस.सी. पूरी पार्क में किया गया। गोष्ठी का आरंभ श्रीमती सरोज सिंह ने सरस्वती वंदना से किया। तत्पश्चात सर्वप्रथम नन्ही कवयित्री आस्था सिंह ने स्वरचित कविता "जन्मदिन आया है, खुशियां ढेर लाया है" सुनाया। फिर छाया ने अपनी कविता "उसका कल्पित पावन प्रणय" तथा "मन के प्रश्न चिन्ह" सुनाया। उसके बाद वैष्णवी ने "क्या लड़की हुई है से लेकर बधाई हो घर में लक्ष्मी आई है" कविता सुनाकर समाज में कन्या जन्म को लेकर जो उदासी का माहौल छा जाता है उसे है कविता के रूप में प्रस्तुत किया । इसके बाद सिम्पी साहा ने "वक्त तुम्हारा है"कविता सुनाकर समां बांध दिया। काव्य पाठ के दौर को आगे बढ़ते हुए नीतू सिंह ने "जीवन की सच्चाई" नामक कविता का पाठ करके जीवन के सत्य को उद्घाटित किया। तत्पश्चात मंच की उपाध्यक्ष डॉ रजनी गुप्ता जी ने भावपूर्ण कविता सुनाकर सबका हृदय जीत लिया। कविता का शीर्षक था "तुम्हारी कसम कोई मजाक नहीं,प्यार भी तो कोई मजाक नहीं"। इसके बाद सीमा साहा ने "बंधुत्व माने काछे थाका नय" शीर्षक बांग्ला कविता सुनाकर मित्रता का अर्थ बताया तथा "तुमि आछो शुधु तुमी" बांग्ला कविता सुनाकर मंत्रमुग्ध कर दिया। फिर नज्मकारा मीनू झा जी ने एक इंतखाब सुनाया जिसका शीर्षक था "चलने का हौसला नहीं रुकना मुहाल कर दिया। इश्क के इस सफर ने तो मुझको निढाल कर दिया" तथा "यह रात ठंडी हवा बहा रही है " गज़ल सुनाया। 
कविता ,गीत, गजल की प्रस्तुतियों के बाद मंच की सचिव सरोज सिंह ने रविंद्रनाथ टैगोर की कविता "अमादेर छोट्ट नदी" का पाठ किया।
 कार्यक्रम के अंत में अध्यक्ष डॉ शारदा प्रसाद ने पढ़ी गई कविताओं का समाहार प्रस्तुत किया तथा स्वरचित कविता "एक कली कांटों में खिली"और "मिलना और बिछड़ना ही तो जीवन का है सार प्रिये" का पाठ करते हुए जीवन को व्याख्या सहित किया।
इसके पश्चात अंत में झारखंड की मेजबानी में आयोजित मंच का छठे राष्ट्रीय वार्षिकोत्सव की रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें मंच के संस्थापक डॉ नरेश नाज, ग्लोबल अध्यक्ष,राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सारिका भूषण, प्रांतीय अध्यक्ष श्रीमती मोना बग्गा सहित छ: राज्यों से आई हुई प्रतिनिधि कवित्रियों ने अपनी सहभागिता निभाई । मेजबान झारखंड राज्य से 8 राज्यों की जिला अध्यक्ष सहित बड़ी संख्या में कवित्रियों ने अपनी सक्रिय सहभागिता निभाई। जिसमें रामगढ़ जिले की विशेष प्रस्तुति थी वैष्णो जन तो तेणे कहिए जे पीड़ पराई जाणे रे जिसे श्रीषा ने प्रस्तुत किया था तथा डॉ. शारदा प्रसाद, श्रीमती सरोज सिंह एवं श्रीमती मोना बग्गा ने साथ दिया था। कार्यक्रम की विशेष बात यह थी कि जो सदस्य उपस्थित नहीं हो पाईं उनके प्रमाण पत्र आज की गोष्ठी में ससम्मान और सस्नेह प्रतिभागियों को भेंट किया गया। 
 धन्यवाद ज्ञापन उपाध्यक्ष डॉ रजनी गुप्ता ने तथा मंच संचालन सरोज सिंह ने किया।

Post a Comment

0 Comments
Post a Comment (0)

--ADVERTISEMENT--

--ADVERTISEMENT--

NewsLite - Magazine & News Blogger Template

 --ADVERTISEMENT--

To Top