परिवार प्रथम पाठशाला तथा माताएँ प्रथम गुरु: प्राचार्य ,Family first school and mothers first teacher: Principal

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 बैठक को सम्बोधित करते प्राचार्य एवं मौजूद अथिति



रजरप्पा - रजरप्पा कोयलांचल अंतर्गत सरस्वती विद्या मंदिर के सभागार में सोमवार को प्रारंभिक बाल्यावस्था, शिक्षण एवं देखभाल 'के अंतर्गत शिशु वाटिका के भैया-बहनों की माताओं की एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी का शुभारंभ प्राचार्य उमेश प्रसाद, मुख्य अतिथि दक्षिणी सेवई की पूर्व मुखिया राजकुमारी देवी के द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। प्राचार्य श्री प्रसाद ने माताओं को संबोधित करते हुए कहा कि परिवार जहाँ प्रथम पाठशाला होती है, वहीं माताएँ प्रथम गुरु होती हैं। अतः शिशु की प्रारंभिक बाल्यावस्था, शिक्षण एवं देखभाल में माताओं की प्रमुख भूमिका होती है। अपने संबोधन में मुख्य अतिथि ने कहा कि माताएँ नन्हें शिशु में संस्कार एवं शिष्टाचार को बड़े सरल ढंग से सीखा सकती है। विद्यालय की शिशु वाटिका प्रमुख आचार्या अमृता चौधरी द्वारा ' प्रारंभिक बाल्यावस्था, शिक्षण एवं देखभाल' पर विस्तृत चर्चा करते हुए शिशु के विकास में माताओं की महत्ता का उल्लेख किया गया। गोष्ठी में कई माताओं द्वारा भी अपने विचार व्यक्त किए गए। उपस्थित माताओं एवं अभिभावकों के बीच रोचक एवं मनोरंजक खेल भी हुए जो नन्हें शिशु को बहुत अच्छे एवं लुभावने लगते हैं तथा खेल - खेल में अक्षर एवं अंक ज्ञान सीखते हैं। गोष्ठी में लगभग 100 माताओं की उपस्थिति रही। इसे सफल बनाने में आचार्या पूनम सिंह, ललिता गिरी, सुमन कुमारी, रानी कुमारी, ममता कुमारी, दुर्गा प्रसाद महतो, विदेश सिंह, अमरदीप, शुक्ला चौधरी, रेखा कुमारी, गायत्री पाठक की प्रमुख भूमिका रही तथा मंच संचालन आचार्या गायत्री कुमारी ने की।

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